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डॉ बाबासाहेब आंबेडकर विचार मराठी

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आदित्य ने ज़रीना के लिखे नॅपकिन अपनी जेब में डाल लिए और ज़रीना ने आदित्य के लिखे नॅपकिन अपने पर्स में. शीतल ने खुद साइन नही किए थे। राज ने साइन करके कागज वहीं मेज पर रख दिए। शीतल की हिम्मत उन्हें उठाने की नही हुई। वो आँख बंद करके लेट गयी और जब राज सो गया तब उसने उन कागज को देखा। कुछ देर देखती रही फिर बिना साइन किए सो गयी।

उस लेडी के जाने के बाद ज़रीना ने कहा, देखा आदित्य, इस तरह से लेगी दुनिया हमारे प्यार को. कैसे चिड कर भाग गयी यहा से. कितनी नफ़रत है दुनिया में प्यार के लिए लोगो के दिलो में. डॉ बाबासाहेब आंबेडकर विचार मराठी तो तुमने ऑपरेशन क्यों नही कराया?तुम पागल हो गयी हो। क्या कर रही हो ?अपनी जिंदगी के साथ? राज ने थोड़ा गुस्से से कहा।

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शीतल ने उसकी बात पर कोई ध्यान नही दिया और बाथरूम में चली गयी। जैसे ही वो बाथरूम से कपड़े बदल कर बाहर निकली तुरंत ही राज ने फिर कहा-शीतल मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। बालों को खूब ध्यान से सँवारा आदित्य ने. चेहरे पर अच्छे से क्रीम रगड़ ली. कोई कमी नही छोड़ना चाहता था. ये भी प्यार ही है. आप जिसे प्यार करते हैं उसके सामने सुंदर दीखने की चाहत सब में होती है.

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सिर्फ इन दोनों को मेरी मौत का दुःख होगा, मगर इन दोनों मूर्खों को मेरी अंतिम सलाह ये है कि किसी को सोच-समझकर प्यार किया करें—प्यार इंसानों से किया जाता हैं, जानवरों से नहीं।

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